Protected: Exercise

This content is password protected. To view it please enter your password below:

Some useful vitamins that lower blood sugar — AllAbout dot CF

Certain vitamins and minerals have been found beneficial in lowering blood sugar and thus useful in the treatment of diabetes. Vitamin B complex – Vitamins of the B group are valuable in the treatment of diabetes. Despite and adequate intake of these vitamins, diabetics often have abnormally small amounts of vitamin B in their blood…

Some useful vitamins that lower blood sugar — AllAbout dot CF

“Three Steps for Success”

प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में सफलता प्राप्त करना चाहता है l अधिकांश व्यक्ति सफलता की प्राप्ति के लिए गंभीर प्रयास भी करते हैं, किंतु कई बार उसके बाद भी उन्हें वह वांछित सफलता नहीं प्राप्त हो पाती है जिसकी चाहत उन्हें होती है l वास्तव में लक्ष्य की प्राप्ति के लिए किया गया सूक्ष्म से सूक्ष्म भी व्यर्थ नहीं जाता किंतु जब तक हम लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर लेते हम सफल नहीं कहे जाएंगे l लक्ष्य की प्राप्ति के लिए किये गए प्रत्येक प्रयास और प्रत्येक कदम हमें सफलता की ओर ले जाते हैं किंतु जब तक हमें सही दिशा ज्ञात नहीं होगी हम मंजिल तक नहीं पहुंचाएंगे सिर्फ रास्ते का प्रतीक बन कर रह जाएंगे l जब तक हम मंजिल पर नहीं पहुंचेंगे  पथ का सफर कितना भी सुहाना हो सफल नहीं माने जाएंगे l सफलता की प्राप्ति कई आयामों पर निर्भर करती है जो भिन्नभिन्न व्यक्ति के विभिन्न हो सकते हैं किंतु इन विभिन्न आयामों में कुछ आयाम सभी व्यक्तियों में समान हो सकते हैंl सफलता के लिए निम्नलिखित प्रमुख आयामों पर ध्यान देना अति आवश्यक है l

1.लक्ष्य का निर्धारण

सबसे पहले तो लक्ष्य का निर्धारण अति आवश्यक है l अधिकांश व्यक्ति को पता ही नहीं होता कि वह जीवन में क्या चाहते हैं l लक्ष्य का जीवन में होना उतना ही आवश्यक है जितना एक चालक के लिए मानचित्र या नागरिक के लिए कंपास का होना आवश्यक है l हवाएं कितनी भी अनुकूल हो तथा नाविक कितना भी कुशल हो लेकिन यदि नाविक को अपना गंतव्य ही पता नहीं तो व्यर्थ है l अधिकांश व्यक्ति अपने जीवन में हर उस छोटी छोटी बात के लिए परेशान रहते  हैं जो वास्तव में उनके जीवन का उद्देश्य ही नहीं होता अतः अपने जीवन में लक्ष्य का निर्धारण करना अति आवश्यक है l

2.अपनी क्षमता एवं संसाधनों का सही आकलन

ऐसा अक्सर सुनने को मिलता है कि मनुष्य के पास असीमित शक्ति होती है और वह कुछ भी कर सकता है l हां यह सत्य है कि मनुष्य कुछ भी कर सकता है किंतु सभी मनुष्य के लिए संभव नहीं की वह सब कुछ कर सके, एक स्थिति के बाद संभावनाएं सीमित हो जाती हैं l यद्यपि कोई कोई विषम परिस्थितियों में असंभव से लगने वाले कार्य को संभव कर आश्चर्यचकित कर सकते हैं किन्तु ऐसे उदाहरण उंगलियों पर गिने जा सकते हैं l अतः अपने लक्ष्य के  निर्धारण के  समय अपनी क्षमताओं का सही आकलन करना अनिवार्य हैl अपनी क्षमताओं का आकलन करने के बाद संपूर्ण क्षमता  का प्रयोग लक्ष्य प्राप्ति के लिए करें l

3. क्षमताओं एवं संसाधनों का समुचित उपयोग

अपनी क्षमताओं एवं संसाधनों का आकलन करने के बाद उसका समुचित उपयोग अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए करें l याद रखें किस्तों में किया गया प्रयास कभी सफलता प्रदान नहीं करता और सबसे जरूरी बात यह है कि परिणाम कुछ भी हो अपनी जिम्मेदारी लेना सीखें और स्वयं के प्रति ईमानदारी अति आवश्यक है l

Concept Of Health

स्वास्थ्य सिर्फ बीमारियों की अनुपस्थिति का नाम नहीं है बल्कि यह एक वृहत अवधारणा है । हमें सर्वांगीण स्वास्थ्य के बारे में जानकारी होना अतिआवश्यक है। स्वास्थ्य का अर्थ भिन्न भिन्न लोगों के लिए भिन्न भिन्न हो सकता  है  लेकिन अगर हम एक सार्वभौमिक दृष्टिकोण की बात करें  तो स्वस्थ्य का अर्थ होता है कि हम अपने जीवन में आनेवाली सभी सामाजिक, शारीरिक और भावनात्मक चुनौतियों का प्रबंधन करने में सफलतापूर्वक सक्षम हों ।

Don’t Let the Passion Fade away with your busy Life

divyasing

I am Divya Singh from Allahabad. I am a post graduate with an M. Pharma. I have my small business of pharmacy. I have an interest in writing from my childhood. I have not taken it seriously ever in my life. But after my PG I got a placement in one of the MNC company of Gurgaon (now known as Gurugram) where I initially got the position of Medical Content Writer. That company was an IT E- commerce firm which deal with medicine. My passion has become my job, that was amazing for me and I got hooked with my work. I learned how to write blogs, articles, press release and meta description for the sites. I started enjoying my work. Even it pushed up me to learn more and more. I started learning SEO, maintaining websites, participating in more and more forums, dashboards and scoring points. I started taking…

View original post 516 more words

Take Care When You Dehydrate

divyasing

Mild to moderate dehydration may include the following signs and symptoms-

  • 1. Increased thirst.
  • 2.Dry mouth.
  • 3.Tired or sleepy.
  • 4.Decreased urine output.
  • 5.Urine is low volume and more yellowish than normal.
  • 5.Headache.
  • 6.Dry skin.
  • 7.Dizziness

Treatment-
1.By ORS like electrol powder
2.By i.v. fluid like DNS or Ringer lactate

-If any one filling symptoms of above then it may be possible that he/she is suffering from dehydration.
-Take a sachet of ORS and it mixed in a 1000ml of water and take this solution orally.
-Treat the cause of dehydration.

View original post

GOD AND BRAIN 1

प्रस्तर मानव से अंतरिक्ष मानव तक के सफ़र में मानव ने अनेक प्रकार की परिकल्पना की जिसमे से दो जो सबसे आश्चर्यजनक है वो है ईश्वर की परिकल्पना l हमारी कल्पना के अनुसार ब्रह्माण्ड एक व्यवस्थित रूप में विद्यमान है जिसको किसी शक्ति द्वारा रचित किया गया है और इसी शक्ति को हमने ईश्वर का नाम दे दिया और फिर आगे इस सिद्धांत को प्रतिपादित किया गया की संसार का कण कण इस शक्ति द्वारा संचालित होता है l फिर आगे ईश्वर के बारे में संसार के लगभग हर धर्मो में भिन्न भिन्न बाते कही गयी जिनका सारतत्व लगभग यही है की ईश्वर ही इस सृष्टि का कर्ता और संहर्ता l हमारी कल्पना में ईश्वर सर्वशक्तिमान है प्रकृति में होने वाली हर घटनाओं का कारण वाही है l

हमारी जो दूसरी सबसे आश्चर्यजनक परिकल्पना है वो मानव मष्तिस्क l यह माना जाना है की मानव में एक मस्तिष्क होता है जिसके नियंत्रण में मानवशारीर और उसमे घटित होने वाली सारी क्रियाये होती l वस्तुतः मानव मष्तिष्क को संसार का सबसे विकसित वस्तु मानी जाती है और आधुनिक विज्ञानं का मानना है की मनुष्य अपने मस्तिष्क के द्वारा अपनी सभी समस्याओ का हल प्राप्त कर सकता है l आधुनिक विज्ञानं में मस्तिस्क के बारे में बहुत जानकारी नहीं प्राप्त है और ऐसा मन जाता है की मानव अपने मस्तिस्क का 5 प्रतिशत भाग ही प्रयोग कर पता है l

अब हम इस बात पर आते है की इन दोनों परिकल्पनाओ की उत्पति कैसे हुई l ईश्वर की परिकल्पना जहा धर्म की देन है वही मानव मस्तिस्क विज्ञानं की देन है और ये दोनों परिकल्पनाए जहा एक दुसरे की विरोधभासी है वही एक दुसरे का समर्थन भी करती है l ईश्वर की परिकल्पना मानव मस्तिष्क के विकास का चरम है क्योकि मनुष्य का मस्तिस्क जब किसी समस्या को हल करने में अपने को असमर्थ पता है तो इश्वर को सामने लाता है और अपनी समस्या का कारक ईश्वर को बताता है