10 things that happen to your body if you walk every day.

Don’t Let the Passion Fade away with your busy Life

divyasing

I am Divya Singh from Allahabad. I am a post graduate with an M. Pharma. I have my small business of pharmacy. I have an interest in writing from my childhood. I have not taken it seriously ever in my life. But after my PG I got a placement in one of the MNC company of Gurgaon (now known as Gurugram) where I initially got the position of Medical Content Writer. That company was an IT E- commerce firm which deal with medicine. My passion has become my job, that was amazing for me and I got hooked with my work. I learned how to write blogs, articles, press release and meta description for the sites. I started enjoying my work. Even it pushed up me to learn more and more. I started learning SEO, maintaining websites, participating in more and more forums, dashboards and scoring points. I started taking…

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Take Care When You Dehydrate

divyasing

Mild to moderate dehydration may include the following signs and symptoms-

  • 1. Increased thirst.
  • 2.Dry mouth.
  • 3.Tired or sleepy.
  • 4.Decreased urine output.
  • 5.Urine is low volume and more yellowish than normal.
  • 5.Headache.
  • 6.Dry skin.
  • 7.Dizziness

Treatment-
1.By ORS like electrol powder
2.By i.v. fluid like DNS or Ringer lactate

-If any one filling symptoms of above then it may be possible that he/she is suffering from dehydration.
-Take a sachet of ORS and it mixed in a 1000ml of water and take this solution orally.
-Treat the cause of dehydration.

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दिल की देखभाल कैसे करे .

स्वस्थ ह्रदय एक स्वस्थ शरीर का आधार होता है इसलिए शरीर को स्वस्थ होने के लिए ह्रदय का स्वस्थ होना अतिअवाश्यक होता है l ह्रदय को स्वस्थ रखने के लिए खानपान के साथ साथ ब्यायाम और जीवनशैली में सुधार करना बहुत जरुरी है । आजकल की भागदौड़ और तनावयुक्त  जिंदगी में हृदय संबंधी रोगों की संख्या दिन पर दिन बढ़ती जा रही है l कुछ आवश्यक बातो पर ध्यान देकर ह्रदय सम्बन्धी विकारो से बचा जा सकता है

1.नियमित व्यायाम

हृदय की मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के लिए नियमित रूप से व्यायाम बहुत जरूरी है। इससे हृदय की मांसपेशिया तो मजबूत होने के साथ ही  धड़कन प्रक्रिया बेहतर तरीके से होती है, साथ ही शरीर में  रक्त का प्रवाह बना रहता है जिससे शरीर को  आसानी से ऑक्सीजन प्राप्त होता है, जिससे आपकी कार्यक्षमता बढ़ती है और ताकत मिलती है। कभी भी अपने शरीर पर अत्यधिक भार मत लें। अगर आपको कुछ समय के लिए थकावट महसूस हो रही है तो कार्य शुरू करने से पहले शरीर को 15 मिनट का आराम दें। जिससे आपकी कार्यशक्ति वापस बढ़ सके।

2.धूम्रपान और अल्कोहल छोड़ें

धूम्रपान और अल्कोहल करने वाले व्यक्तियों में दिल का दौरा या आकस्मिक हृदय रोग से मृत्यु होने की संभावना आम व्यक्तियों की तुलना में दुगुनी होती है। धूम्रपान छोड़ देने के 10 वर्षो के अंदर इन बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। तो आप अभी से ही धूम्रपान से मुक्त होने के लिए कदम क्यों नहीं उठातीं।

3.वजन पर करें नियंत्रण

ह्रदय को स्वस्थ रखने के लिए वजन का नियंत्रण आवश्यक है ,मोटे लोगो में ह्रदय रोग होने की सम्भावना बढ़ जाती है lयदि आपका वजन अधिक है तो आपके हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और उसे शरीर में रक्त के प्रवाह को बनाये रखने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है जिसके लिए उसे जोर  से धड़कना पड़ता है। अधिक वजन का कारण असंतुलित भोजन और व्यायाम की कमी है, जिससे कई अन्य रोग भी जन्म लेते हैं। इससे बचाव का सबसे अच्छा तरीका है, ताजे फल, हरी सब्जियां, संतुलित भोजन का सेवन और नियमित व्यायाम।

 4.वसा के प्रयोग में कमी करे

वसा का कम से कम प्रयोग हृदय को कई रोगों से बचाता है। रक्त में कोलेस्ट्रोल बढ़ने से रक्तवाहिनियो में एथिरोस्क्लिरोसिस हो जाती है जो हृदय में रक्त के प्रवाह को कम करती है lह्रदय को शरीर में प्रवाह बनाये रखने के लिए अधिक परिश्रम करना पड़ता है l अगर आप शुरू से ही कम वसा के इस्तेमाल का नियम बना लें तो हृदय संबंधी गंभीर रोगों से बचाव कर सकते है l पशुओं से प्राप्त पदार्थो जैसे मांस, मक्खन, चीज में वसा अधिक पाई जाती है, साथ ही पकाए गए बिस्कुट या केक में भी यह अधिक होता है। इनसे शरीर में कोलस्ट्रॉल की मात्रा तो बढ़ती  है l

5.तनाव से बचे

तनावग्रस्त रहना स्वस्थ जीवन का शत्रु  है। कल्पना कीजिए जैसे कि आप अत्यधिक चीजों को एकसाथ नहीं संभाल पाते हैं वैसी ही स्थिति आपके हृदय के साथ भी हो सकती है। रोज का अत्यधिक तनाव ब्लड प्रेशर को तो बढ़ाता ही  है  साथ ही साथ यह हृदय की मांसपेशियों को भी प्रभावित करता है। इसलिए तनावमुक्त रहने का प्रयत्‍‌न करें, पर्याप्त नींद लें और साथ ही आराम के लिए भी समय रखें। तनाव से बचने के लिए ध्यान करें, यह आपके लिए लाभदायक होगा।

6.भोजन में फल और मछली का इस्तेमाल करे

स्वस्थ हृदय के लिए जरूरी है कि रोज आपके भोजन में कम से कम पांच प्रोटीनयुक्त फल और सब्जियां हों। ये विटामिन व प्रोटीनयुक्त होते हैं जो कि एलडीएल को कम करने में सहायक होते हैं तथा कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने से रोकते हैं। हृदय को स्वस्थ व स्वच्छ रखने के लिए सभी आवश्यक तत्व फलों में होते हैं। इसलिए फलाहार जरूर करें। ट्राउट, सालमन या टुना जैसी ऑयली मछली में ओमेगा 3 और ओमेगा 6 के जरूरी तत्व होते हैं, जो कि कोरोनरी हृदय रोग के लिए दिए जाते हैं और ये रक्त के थक्के बनने से रोकथाम में मदद करता है। 

7. कम करें नमक का सेवन

शरीर में सोडियम की मात्रा सही अनुपात में बनाएं रखने के लिए भोजन में नमक की कुछ मात्रा होना जरूरी है, पर ज्यादा तेज नमक हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग का कारण भी बन सकता है। अपने भोजन में ज्यादा नमक न लें और ज्यादा नमकीन नाश्तों का सेवन भी कम करें। पोटेशियम के लिए फल व सब्जियां अच्छे स्त्रोत हैं जो प्राकृतिक रूप से आपके शरीर में सोडियम की मात्रा बनाए रखने में सहायक होते हैं।

डिप्रेशन :क्या करें ?

                                         यूं तो हमारे जीवन में उतार चढ़ाव आते रहते हैं जिसके फलस्वरूप हम खुश और दुखी दोनों होते हैं I यह बहुत ही सामान्य प्रक्रिया है जैसे कि किसी अपने की मृत्यु हो जाने पर दुखी होना, किसी काम में असफल होने पर दुखी होना, या फिर किसी बात का बुरा लग जाना I ये भावनाए समय के साथ साथ कम हो जाता है और खत्म भी हो जाता हैI लेकिन जब यह उदासी, दुख या बेचैनी लंबे समय तक रहते हैं तो हम एक प्रतिकूल वातावरण से गिर जाते हैं जो हमें धीरे धीरे अवसाद की ओर ढकेल होता हैI अवसाद जिसे हम आम भाषा में डिप्रेशन कहते हैंI

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार डिप्रेशन बहुत ही सामान्य बीमारी है जिससे लगभग 350 मिलियन लोग ग्रसित हैI डिप्रेशन एक प्रकार का मानसिक विकार जिसे हम मूड विकार भी कह सकते हैं क्योंकि इसमें व्यक्ति लगातार उदास रहता है या फिर उसका किसी भी काम में मन नहीं लगताI हालाकि यह सामान्य प्रतिक्रिया पर यदि यह भावना अस्थाई भावना में परिवर्तित हो जाए तब डिप्रेशन होने की पूरी संभावना है

डिप्रेशन के लक्षण

  • उदासी
  • बुरी मनोदशा खासकर उन व्यक्तियों में जो आत्महत्या का विचार किए हुए हैं
  • चिंता खासकर उन बातों के लिए जो आमतौर पर आपको चिंता में नहीं डालती थी
  • नींद ज्यादा आना या नींद ना आना
  • पसंदीदा चीजों और गतिविधियों में रुचि खत्म हो जाना
  • परिवार और दोस्तों से दूरी बना लेना
  • बार-बार रोना आना
  • खुद को नुकसान पहुंचाना
  • भूख ज्यादा रखना लगना या कम लगना
  • अपराध बोध का अनुभव होना
  • बेचैनी
  • दूसरों से अलग रहने की इच्छा
  • हमेशा थकान महसूस होना
  • जिंदगी के प्रति उलझा दुआ नजरिया रखना
  • निर्णय लेने में परेशानी होना
  • ऊर्जा स्तर का घट जाना
  • चिड़चिड़ापन, गुस्सा, हताशा

डिप्रेशन के कारण

अवसाद होने के कारणों का कोई खास बिंदु नहीं है इसलिए डिप्रेशन पर अपने डॉक्टर से चर्चा करना जरूरी है, तब भी कई संभावित कारण इस प्रकार है-

  • अनुवांशिकी– यदि आपके पारिवारिक इतिहास में कभी किसी सदस्य को अवसाद हुआ हो तो संभव है कि आप या आने वाले पीढ़ी में किसी को भी अवसाद का अनुभव हो सकता हैI
  • दिमाग में परिवर्तन– कुछ लोगों में डिप्रेशन दिमाग में कुछ परिवर्तन होने के कारण हो जाता हैI इस प्रकार के डिप्रेशन में व्यक्ति के मस्तिष्क रसायन प्रभावित हो जाते हैंI मस्तिष्क में न्यूरो ट्रांसमीटर विशेष रूप से सेरोटोनिन, डोपामिन या नोरेपिनेफ्रिने के असंतुलित हो जाने पर डिप्रेशन होने की संभावना है क्योंकि यह रसायन हमारे सुख और आनंद की भावनाओं को नियंत्रित करते हैंI एंटीडिप्रेसेंट दवाई विशेष रूप से न्यूरोट्रांसमीटर्स को संतुलित करने का कार्य करते हैंI
  • हार्मोन परिवर्तन– कभी-कभी हार्मोन के उत्पादन में परिवर्तन हो जाने पर या हार्मोन के काम करने की क्रिया में परिवर्तन के कारण भी डिप्रेशन हो सकता है जैसे अक्सर बच्चे के जन्म के बाद नई माता में पोस्टपार्टम डिप्रेशन की समस्या हो जाती हैI
  • मौसम के कारण– कभी कभी सर्दियों के दिन में सुस्ती और थकान के कारण हम रोजमर्रा के काम में आलस करते हैंI इसे मौसम प्रभावित विकार कहते हैंI
  • जीवन में परिवर्तन– कभी कभी जीवन में ऐसी घटना घट जाती है जिसके कारण डिप्रेशन हो सकता है जैसे कि बचपन में किसी चोट के कारण या फिर कोई डरावनी घटना घटित होने के कारण, कोई दुर्व्यवहार होने पर, कभी कभी किसी दुर्घटना के कारण भी अवसाद की समस्या उत्पन्न हो जाती हैI

डिप्रेशन से बचाव

डिप्रेशन एक ऐसा मानसिक विकार है जिसे समय रहते उपचार ना किया जाए तो वह आपके जीवन को अंधकार में बदल सकता हैI अवसाद से छुटकारा पाने के लिए दवा का सेवन ही पर्याप्त नहीं हैI डिप्रेशन से बचने के लिए बहुत जरूरी है कि ह  म अपने जीवन शैली में बदलाव लाए, खुशहाली लाए और अच्छे आहार का सेवन करेंI

क्या खाएं– ऐसे कई प्रकार के भोजन है जो हमारे मूड को नियंत्रित करते हैं या बदलाव हमारे मूड में बदलाव लाते हैंI  इसलिए हमें ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए जिसमें ट्रिपटोफैन, ओमेगा 3 फैटी एसिड, फोलिक एसिड उपस्थित हो जैसे कि शतावरी, अंडा, हल्दी, कद्दू के बीजI  इसके अलावा बदाम, काजू, ग्रीन टी, विटामिन और कैल्शियम बहुत ही मददगार हैI

क्या खाए– ऐसे पदार्थ जिनमे कैफ़ीन और निकोटीन न होI शराब और धूम्रपान भी से भी दूरी बनानी चाहिएI फास्ट फूड, कार्बोहाइड्रेट और आर्टिफिशियल स्वीटनर के सेवन का प्रयोग बंद कर देना चाहिएI संभव हो तो चीनी से भी दूरी बनाएंI

व्यायाम डिप्रेशन से बचाव का एक अच्छा उपाय है व्यायाम I इसके अलावा कुछ योगासन जैसे कि हलासन, सर्वांगासन, शवासन आदि आपकी स्थिति को सुधार सकते हैंI ध्यान करें और सुबह शाम टहल भी सकते हैं जिससे आपको खुशी मिलेगीI इसके अलावा अध्यात्मिक किताबें भी आपकी मदद कर सकती हैंI या फिर आप अपने मनपसंद उपन्यास या कोई और भी किताब पढ़ सकते हैंI भजन सुनिए, पवित्र शास्त्र पढ़िए जो आपके मन को शांत रखेगा इसके अलावा आपके अंदर सकारात्मक विचारों को बढ़ावा देगाI आप अपनी मनोदशा को मधुर संगीत सुनकर भी बदल सकते हैंI मधुर संगीत आप के माहौल को खुशनुमा बना देती है पर संगीत सुनते समय उदासी वाला या फिर नकारात्मक प्रभाव डालने वाले गीतों को ना सुनेI अवसाद से बचने के लिए नियमित समय पर सोए और सुबह जल्दी उठने का प्रयास करेंI सोने से पहले लैपटॉप और मोबाइल से दूरी बनाएंI अपने शौक एवं अन्य गतिविधियों में व्यस्त रहियेI अपने दोस्तों और परिवार जनों के साथ समय बिताएंI

Polyhydramnios

Polyhydramnios is a medical condition in which an excess of amniotic fluid is present in the amniotic sac. It is seen in about 1% of pregnancies. It is typically diagnosed when amniotic fluid index (AFI) is greater than 24 cm.

 Polyhydramnios condition may be of two types:

       Chronic polyhydramnios where excess amniotic fluid accumulates gradually.

       Acute polyhydramnios where excess amniotic fluid collects rapidly.

Causes of polyhydramnios may be single or may be multiple and in many cases cause of polyhydramnios may be not known. Some important causes of polyhydramnios are maternal cardiac problems, renal problems, maternal diabetes mellitus, and some viral infection and foetal cause are congenital foetal malformation (tracheao esophageal fistula, anencephaly, open spina bifida, facial cleft and neck masses), twin baby syndrome, Rh blood group incompatibility and chorioangioma of placenta, etc.

In majority of cases the accumulation of amniotic fluid is gradual and the patient is not very much inconvenienced. The patient may suffer from dyspnoea, palpitation, edema of leg, varicosities in the legs or vulva and haemorrhoids.

Investigation by sonography in which AFI is more than 24cm. on the basis of AFI polyhydramnios may be of mild, moderate and severe. If AFI is upto 29cm it is categorised as mild and in between 29 to 35cm it is moderate. When AFI is more than 35cm it is severe type of polyhydramnios. In case of severe polyhydramnios the chance of foetal malformation is more and perinatal mortality rate is high. Radiography is not commonly performed these days.

Polyhydramnios can cause maternal and foetal complication. Maternal complications may be eclampsia, malpresentation, premature rupture of membrane, pre-term labour, accidental haemorrhage, cord prolapse, uterine inertia.

The death of foetus is mostly due to prematurity and congenital abnormality.

Management of polyhydramnios depend on the severity of it. In minor degree amnios usually require no treatment except extra bed rest for few days. In case of severe case of polyhydramnios if there is no foetal abnormality and pregnancy is less than 37 weeks amino reduction is done.

L-arginine and Its Importance in our body

L-arginine

  1. What is L-arginine?
  2. Sources of L-arginine in our body.  
  3. Benefits of L-arginine
  4. Side effects of L-arginine
  5. Natural ways to get enough L-arginine
What is L-arginine?

L-arginine is   a nonessential amino acids which   can be made by our body and  it is very essential for  body  function. L-arginine play very important role in building protein in body.  In addition to building protein, L-arginine releases nitric oxide in the blood. Nitric oxide help in dilation of the  blood vessels in the body, which may help aid certain circulatory conditions.

Sources of L-arginine in our body.  

A person’s naturally produces L-arginine under normal condition. People also get additional L-arginine as part of their regular diet.

Red meats, fish, dairy, and eggs all contain low amounts of L-arginine that help the body to maintain its normal level in body.

In many condition like in older people or in certain medical condition , a person’s need for L-arginine may exceed the body’s ability to produce or consume it naturally. In these cases, people may be prescribed artificial L-arginine in the form of injections, oral medication or creams. Some people take L-arginine as a supplement. As with any supplement, a person should use it with caution.

Benefits of L-arginine

L-arginine has two effects: helps the body build protein and it turns into nitric oxide .

These effects give L-arginine an array of potential benefits that range from  helping to build muscles, repair wounds, and improve male fertility to heart health and chest pain .

 uses of L-arginine
  • growth hormone reserve test
  • reducing high blood pressure and treatment of many  heart disease
  • correcting inborn errors of urea synthesis
  • treating erectile dysfunction (ED) and alleviate anxiety
  • easing inflammation of the digestive tract in premature infants
  • controlling blood sugar in people with diabetes
  • improve blood flow in body
  • heal wounds faster and treatment of  burns
  • improve kidney function for people with congestive heart failure
  • enhance exercise performance
Side effects of L-arginine

L-arginine is considered safe in moderate doses but high dose of  L-arginine can have severe side effects, including death. It is important to understand how the supplement may interact with the body and with additional medications before taking it. Some of the more common and benign side effects include:

  • gout
  • bloating
  • abdominal pain
  • airway inflammation
  • diarrhoea
  • low blood pressure
  • blood abnormalities
  • allergies
  • worsening of asthma
Risks and complications

L-arginine has some potentially serious risks for certain groups of people.

These include:

  • difficulty controlling blood pressure during surgery
  • increased risk of death after a heart attack
  • serious illness or death in children and infants
  • worsening of herpes flares
  • Drug  interaction with certain medications, like Viagra and blood pressure medications

Although there are risks associated with L-arginine, most research indicates it is safe for people to take in small doses.

Natural ways to get enough L-arginine

If L-arginine obtain through diet is that it is difficult to get too much. Therefore,  the side effects of consuming too much L-arginine can be avoided. Taking L-arginine through   food consumption alone may not provide enough L-arginine to meet a person’s needs. A person can maintain L-arginine level by changing their diet Plan.

The best natural source for L-arginine is food high in protein. For some people, animal proteins, such as red meat (beef), chicken and turkey breast, pork loin, and dairy products, may be the primary source of L-arginine.

For people who do not eat meat, plant-based proteins that contain L-arginine include lentils, chickpeas, peanuts, pumpkin seeds, and soybeans. Plant based proteins such as chickpeas are a good source of L-arginine

People who find they have a deficient amount of L-arginine to meet their needs may want to modify their diet to include foods rich in protein.

Ten Inspirational Quotes for Self Motivation — Educated Unemployed Indian

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ABNORMALITIES ASSOCIATED WITH SEX CHROMOSOME

Sex chromosome abnormalities are gender specific. Female abnormalities are due to variation in number of X chromosome .Male abnormalities are due to either the X or the Y chromosome or both.

Sex Chromosomal abnormalities

  1. Turner’s syndrome
  2. Klinefelter’s  syndrome
  3. Triple X syndrome
  4. Testicular feminizing syndrome
  5. True hermaphrodites
  6. Developmental abnormalities

1.TURNER’S  SYNDROME:- Turner ,s syndrome is also known as gonadal or ovarian dysgenesis. This is a condition that affects only females, results when one of the X chromosomes (sex chromosomes) is missing or partially missing. Turner syndrome can cause a variety of medical and developmental problems. In This case Karyotype is 45 XO (44 autosome + 1 sex chromosome).This is results from nondisjunction of one X chromosome.

Characteristics feature-

  • Diminish sexual development.
  • Webbing of neck.
  • Gonadal tissue absent or rudimentary.
  • Primary amenorrhea.
  • No sexual maturation at puberty.

2.Klinefelter’s syndrome:- This is also known  as  SEMINIFEROUS TUBULE DYSGENESIS. This  syndrome is a genetic condition that results when a boy is born with an extra copy of the X chromosome. It is a condition affecting males, and it often isn’t diagnosed until adulthood This is Most common sex  chromosomal abnormality .  Karyotype is 47 XXY (44 autosome + XX sex chromosome +one extra Y chromosome)

Characteristics feature-

  • Feminine feature in an apparent male with small testis.
  • Patient is genetically female but develop male genitalia.
  • Male characteristics develop due  to adequate testosterone
  • Mental retardation
  • Primary hypogonadism and infertility
  • Seminiferous tubules are not properly develop

3.Triple  x syndrome:-This is a common aberration of sexual differentiation in which the karyotype is XXX .Usually, it is not associated with any characteristic abnormalities  and therefore remains undetected.In this case Females are known as super females.

Characteristics feature-

  • Taller than the average height.
  • Ovary abnormalities lead to premature ovarian failure.
  • Learning difficulties in speech and language.
  • In the range of low or normal intelligence.

4.TESTICULAR FEMINIZATION SYNDROME:- The patient appear normal females externally. The chromosome are 46  in number with  XY KARYOTYPE. This is a X-Linked recessive   disorder.  These are the Androgen receptor resistance-high testosterone blood level.

Characteristics feature:-

  • Patient is genetically  male but appears like normal female.
  • Primary amenorrhea.
  • no development of uterus.
  • Gonads are testis with immature seminiferous tubule.
  • Testis are present but spermatogenesis does not occur.

5.TRUE  HERMAPHRODITISM:-This is a rare condition in which both testis and ovaries are present.In this case  karyotype is 46 (XX-XY).Sometimes , ovary is present on one side and testis is present on the opposite side. Both male and female sex differentiations occur with development of combined female & male external and internal genitalia.

6.PSEUDOHERMAPHRODITISM:-A pseudo hermaphrodite is an individual with genetic constitution and gonad of one sex , but the external genitalia of other sex .Patients have normal gonadal development according to their chromosome. Both male and female pseudo hermaphrodite are present.

1.Female pseudo hermaphroditism-

  • Male external genital develop in genetic female.
  • Individual posses ovary and oviduct with varying degree of masculine differentiation.
  • Source of androgen is congenital virilising adrenal hyperplasia.
  • Chromosomal sex is female.

2.Male pseudo hermaphroditism-

  • Development of female external genitalia in genetic male.
  • Due to defective testicular development.
  • Also due to androgen resistance or due to defect in androgen receptor.

Diagnosis of Sex Chromosomal abnormalities-Chromosomal abnormality can be diagnosed before birth by-

  1. Amniocentesis
  2. Chorionic villi sampling
  3. Triple marker screening test   

1.Amniocentesis– It is a procedure in which amniotic fluid is removed from the uterus for testing or treatment. Amniotic fluid is the fluid that surrounds and protects a baby during pregnancy. This fluid contains fetal cells and various proteins.

2.Chorionic villus sampling (CVS)– It is a prenatal test in which a sample of chorionic villi is removed from the placenta for testing. The sample can be taken through the cervix (trans cervical) or the abdominal wall (transabdominal).

  • 3.Triple marker screening test-  This is also knows as  triple test or  triple screen, the Kettering test or the Bart’s test.  This  is an investigation performed during second trimester of  pregnancy  to classify a patient as either high-risk or low-risk for chromosomal abnormalities (and neural tube defects). Triple marker screening test is used to measure the 3 substance
  • Alpha- fetoprotein
  • Human chorionic gonadotrophin
  • Estradiol.

Sex chromosomal abnormalities are rare seen in human population.Chromosomal error prevent a foetus from developing normally and because of this abnormality miscarraige occur in 1st trimester of pregnancy

Methods of Contraceptions

CONTRACEPTIVE METHODS

Contraceptive measures are methods used to prevent conception (pregnancy).They include all temporary and permanent measures to prevent pregnancy   resulting from coitus (sexual intercourse).

             Methods of Contraception:-

  1. NATURAL  METHODS
  2. BARRIER  METHODS
  3. CHEMICAL  METHODS
  4. LONG-TERM / PERMANENT METHOD

1.NATURAL METHOD- It is also  known as fertility-based awareness methods. This is the method that uses the body’s natural physiological changes and symptoms to identify the fertile and infertile phases of the menstrual cycle.

                                  TYPES:-

  1. BASAL BODY TEMPERATURE METHOD
    1. CALENDER METHOD OR  SAFE PERIOD METHOD
      1. LACTATIONAL  AMENORRHEA  METHOD
      1. WITHDRAWAL METHOD

A).BASAL BODY TEMPERATURE METHOD:- Ovulation raises body temperature by ½ – 1 degree F And temperature  will drop if fertilization does not occurs.

     B).CALENDER METHOD :-Couple avoid or abstain coitus from day 10 to 17  of menstrual cycle when ovulation could  be expected  and the chances of fertilisation are very high during the period , it is called fertility period.

C).LACTATIONAL AMENORRHEA:-Ovulation and menstrual cycle does not occur during intense lactation following parturition. Increased level of prolactin inhibit production and secretion of GnRH.  Thus decreases the level of oestrogen in body .Ovulation cannot occur without a surge in oestrogen level. These methods add   chemicals similar to  hormones to stop the  release of an egg and      weaken the sperm. The hormones change  your cervical mucus  and uterine lining, slow  sperm, and reduce          ability of fertilized egg to implant into  uterine wall

D).WITHDRAWAL METHOD:- The man takes his penis out of the vagina before  ejaculation.  Male needs to ejaculate away from  female; sperm on legs and labia can still  travel into vagina.Effectivity  of this method depends on a male’s self knowledge  and self control. Effectiveness: 78-96%.

2..BARRIER  METHODS:-Barrier  method  of contraceptive prevent the meeting   of ovum and sperms after coitus. These includes

  1. Mechanical Barrier
  2. Male condom
  3. Female condom
  4. Diaphragm
  5. Cervical cap
  1. Chemical Barrier
  2. Spermicides
  1. Combined

a).Male condom:-  A thin covering that you unroll over an erect  penis. Made of  latex, polyurethane, or animalmembrane.Put on before any genital contact. At withdrawal, hold the rim in place at the base of  the penis so it doesn’t slip off. It may decrease the sensation for men.Lubrication makes condom less likely to break. Effectiveness: 82-98%.Have no side effect and protect against STD.

b).Female condom:- A soft, loose pouch that is inserted in the  vagina. Flexible rings at each end hold it in  place. Insert the small ring in vagina, large ring  stays outside partially covering labia. It can be put in up to 8 hours before sex. It can be used if you are allergic to latex  (made of nitrile).Men usually feel no reduction  in sensation. Effectiveness: 79-95%

c).Diaphragm &Cervical cap:- A diaphragm or Cervical  cap is a barrier method of contraception that  inside the  vagina and prevents sperm passing through the cervix (the entrance of  womb). A gel that kills sperm (spermicide)  need to use with it.

II).Chemical Barrier:-  (Spermicides)- Achemicals that go inthe vagina before sex and they  immobilize or kills sperm.It ismostly  work for one hour . Put in vagina following   packaging directions.     It need to be put in 10  minutes  before intercourse. Nanoxynol-9 and Octoxynol-3 are chemical used as spermicidal agent .Effectiveness: 72-91%.It may be

  • Cream
  • Gel
  • Foam
  • Film
  • Suppository
  • Sponge

3.CHEMICAL  METHOD:-In this methods    chemicals similar to  hormones added to stop the  release of an egg and  weaken the sperm. The hormones  change   cervical mucus  and uterine lining, slow  sperm, and reduce   ability of fertilized egg to implant into  uterine wall.

                      TYPES OF CHEMICAL  METHODS

                       A).STEROIDAL DRUGS

                        1).The Oral Contraceptive Pills.

                                  1.COMBINED PILLS

                                  2.SEQUENTIAL PILLS

                                  3.MINI PILL OR MICRO PILL

                                  4.PROGESTRON ANTAGONIST

                               2).Depot Preparation.

  1. The Patch
  2. Vaginal Ring
  3. The Shot
  4. Subdermal Implants.

                      B).NON STEROIDAL DRUGS

                                           1).Centchroman

                     C).INTRAUTERINE CONTRACEPTIVE DEVICES

                        D).EMERGENCY CONTRACEPTIVE

A).ORAL CONTRACEPTIVE PILLS :- The Contraceptive pills  (also called  birth control pill or “the Pill”) is a  daily pill  that contains hormones, who  prevent the pregnancy by changing  the  the body function . Hormones are chemical substances that control the functioning of the body’s organs. In this case, the hormones in the Pill control the ovaries and the uterus.

TYPES:-

1.COMBINED PILLS

2.SEQUENTIAL PILLS

3.MINI PILL OR MICRO PILL

4.PROGESTRON ANTAGONIST

1.COMBINED PILLS: – It contains orally active progesterone (nor-ethioesterone , norethynodrel, chromodinone) combined with small amount of oestrogen (ethinyl oestradiol).eg-MALA-D ,MALA-N

 2. SEQUENTIAL PILL:-High dose of oestrogen for 15 days followed by 5      days of oestrogen + progesterone . This inhibits ovulation by suppressing the release of both FSH and LH.

3. MINI PILL OR MICRO PILL:-Low dose of progesterone.

   eg- POP (PROGESTIN ONLY PILLS)

4. PROGESTRONE ANTAGONIST:-Producing abortion following the conception  Inhibiting the progestational effect on uterus.

 eg – MIFEPRISTONE

  Mode of action of pills:-Pills makes cervical mucus thick and renders the cervical mucus hostile  (unfriendly ) to sperm penetration.  It induces endometrial changes which prevent implantation of blastocyst. By an action or hypothalamus which inhibits secretion of LH.

DEPOT PREPARATION:-  Depot  preparations are long acting drugs and highly effective. These are available in four  forms:

  1. The Patch
  2. Vaginal Ring
  3. The Shot or Injectable preparation.
  4. Subdermal Implants

1.The Patch:- A bandage-like patch that sticks to  skin and it changed weekly. no patch required on 4th week of menstrual cycle. Hormones are absorbed through the skin .It is less effective body  weight over 198  pounds.It may causes skin irritation. Prescription needed for its application.Effectiveness: 91-99.7%

2.Vaginal Ring:-  Vaginal rings containing norgestrel are implanted intravaginally .The body absorbs hormones from the  ring through vaginal wall.The ring is  inserted and left in the vagina for 3 weeks. Effectiveness: 91-99.7%

3.The Shot: – A long acting hormone injected intramuscularly. Female is given a shot one time every 3 months. It is non reversible- and once the injection  given , the hormones are in the woman for at  least 3 months. It may take a long time to get  pregnant after the shot. More chance of weight gain than any  other method. Effectiveness: 94-99.8%.It may be two types

i).Oily progestrin preparation

ii).Combined injectable preparation

4.Subdermal Implant:- A soft rod 1 ½ inches long placed  under the skin in your upper arm which  are slowly releases hormones into your  body These are two types

I).Norplant-six flexible silastic tube ,each containing 35mg progesterone (Levonorgestrel).

ii).Norplant(R)2-two rod of (Levonorgestrel).Implant  prevents pregnancy for 3 years, but  can be taken out at any time.Effectiveness: 99.95%

B).NON STEROIDAL DRUGS

    1).Centchroman:- The new oral contraceptive for the females contain a non-steroidal  preparation developed by CDRI    Lucknow marketed under the trade name SAHELI.  It is once a week pill” with very few side effects  and  high contraceptive value.

C).INTRAUTERINE CONTRACEPTIVE DEVICES:- Implantation of foreign body into uterine cavity for contraceptive purposes.

1.NON-MEDICATED IUCDs– eg-Lippes loop

2.MEDICATED IUCDs-These are two types

a).Second generation IUCDs-

 eg-Copper T, Coper T200,NOVA-7,NOVA-T,

                multi-loaded devices.

b).Third generation IUCDs-Harmone releasing IUCDs

    eg- PROGESTASERT, LNG 20

D).EMERGENCY CONTRACEPTIVE :- It is also known as Postcoital pill or Morning after pills.A pill or combination of pills which are recommended within 72 hour s of unprotected intercourse. It contains a higher dosage (DOUBLE DOSE of combined pills )of the same  hormones found in regular birth control. It won’t stop an existing pregnancy .Available at pharmacy for girls  17+, prescription is needed if less than 17 .Effectiveness is  Approx 95% if taken within first  24 hours of unprotected sex, rape or contraceptive failure.

4).LONG-TERM / PERMANENT METHOD:-  These procedures are permanent, and  are usually done by people 35+ years, Both procedures are done in a doctor’s  office.

  1. Female- Tubal  ligation
  2. Male- Vasectomy

Female- Tubal  ligation :-A small incision is made in the abdomen to  access the fallopian tubes. Fallopian tubes are  blocked, burned, or clipped shut to prevent the  egg from traveling through the tubes  . Recovery usually takes 4-6 days.

Male- Vasectomy:-A small incision is made to access the vas  deferens, (the tube through which sperm travels from the  testicle to the penis) and is sealed, tied, or  cut.After a vasectomy, a male will still  ejaculate, but there won’t be any sperm present.