Polyhydramnios

               Polyhydramnios is a medical condition in which an excess of amniotic fluid is present in the amniotic sac. It is seen in about 1% of pregnancies. It is typically diagnosed when amniotic fluid index (AFI) is greater than 24 cm.

 Polyhydramnios condition may be of two types:

  1. Chronic polyhydramnios where excess amniotic fluid accumulates gradually
  2. Acute polyhydramnios where excess amniotic fluid collects rapidly.

Causes of polyhydramnios may be single or may be multiple and in many cases cause of polyhydramnios may be not known. Some important causes of polyhydramnios are maternal cardiac problems, renal problems, maternal diabetes mellitus, and some viral infection and foetal cause are congenital foetal malformation (tracheao esophageal fistula, anencephaly, open spina bifida, facial cleft and neck masses), twin baby syndrome, Rh blood group incompatibility and chorioangioma of placenta, etc.

In majority of cases the accumulation of amniotic fluid is gradual and the patient is not very much inconvenienced. The patient may suffer from dyspnoea, palpitation, edema of leg, varicosities in the legs or vulva and haemorrhoids.

Investigation by sonography in which AFI is more than 24cm. on the basis of AFI polyhydramnios may be of mild, moderate and severe. If AFI is upto 29cm it is categorised as mild and in between 29 to 35cm it is moderate. When AFI is more than 35cm it is severe type of polyhydramnios. In case of severe polyhydramnios the chance of foetal malformation is more and perinatal mortality rate is high. Radiography is not commonly performed these days.

Polyhydramnios can cause maternal and foetal complication. Maternal complications may be eclampsia, malpresentation, premature rupture of membrane, pre-term labour, accidental haemorrhage, cord prolapse, uterine inertia.

The death of foetus is mostly due to prematurity and congenital abnormality.

Management of polyhydramnios depend on the severity of it. In minor degree amnios usually require no treatment except extra bed rest for few days. In case of severe case of polyhydramnios if there is no foetal abnormality and pregnancy is less than 37 weeks amnio reduction is done.

GOD AND BRAIN 1

प्रस्तर मानव से अंतरिक्ष मानव तक के सफ़र में मानव ने अनेक प्रकार की परिकल्पना की जिसमे से दो जो सबसे आश्चर्यजनक है वो है ईश्वर की परिकल्पना l हमारी कल्पना के अनुसार ब्रह्माण्ड एक व्यवस्थित रूप में विद्यमान है जिसको किसी शक्ति द्वारा रचित किया गया है और इसी शक्ति को हमने ईश्वर का नाम दे दिया और फिर आगे इस सिद्धांत को प्रतिपादित किया गया की संसार का कण कण इस शक्ति द्वारा संचालित होता है l फिर आगे ईश्वर के बारे में संसार के लगभग हर धर्मो में भिन्न भिन्न बाते कही गयी जिनका सारतत्व लगभग यही है की ईश्वर ही इस सृष्टि का कर्ता और संहर्ता l हमारी कल्पना में ईश्वर सर्वशक्तिमान है प्रकृति में होने वाली हर घटनाओं का कारण वाही है l

हमारी जो दूसरी सबसे आश्चर्यजनक परिकल्पना है वो मानव मष्तिस्क l यह माना जाना है की मानव में एक मस्तिष्क होता है जिसके नियंत्रण में मानवशारीर और उसमे घटित होने वाली सारी क्रियाये होती l वस्तुतः मानव मष्तिष्क को संसार का सबसे विकसित वस्तु मानी जाती है और आधुनिक विज्ञानं का मानना है की मनुष्य अपने मस्तिष्क के द्वारा अपनी सभी समस्याओ का हल प्राप्त कर सकता है l आधुनिक विज्ञानं में मस्तिस्क के बारे में बहुत जानकारी नहीं प्राप्त है और ऐसा मन जाता है की मानव अपने मस्तिस्क का 5 प्रतिशत भाग ही प्रयोग कर पता है l

अब हम इस बात पर आते है की इन दोनों परिकल्पनाओ की उत्पति कैसे हुई l ईश्वर की परिकल्पना जहा धर्म की देन है वही मानव मस्तिस्क विज्ञानं की देन है और ये दोनों परिकल्पनाए जहा एक दुसरे की विरोधभासी है वही एक दुसरे का समर्थन भी करती है l ईश्वर की परिकल्पना मानव मस्तिष्क के विकास का चरम है क्योकि मनुष्य का मस्तिस्क जब किसी समस्या को हल करने में अपने को असमर्थ पता है तो इश्वर को सामने लाता है और अपनी समस्या का कारक ईश्वर को बताता है